June 18, 2024
Desi Bhabhi Ki Chudai

नमस्कार मेरे प्यारे दोस्तों मैं साक्षी एक बार फिर से आपके लिए एक मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी लेकर आयी हूँ। आज की इस सेक्सी कामुक कहानी का शीर्षक गाँव की देसी भाभी की चुदाई (Desi Bhabhi Ki Chudai) है। 

आगे की कहानी रिषभ ने लिखी है, इस सेक्सी भाभी की चुदाई की कहानी का मजा लीजिए…..

हेलो दोस्तों, मैं रिषभ। एक बार फिर आप सब के बीच अपनी एक मस्त सच्ची सेक्स कहानी ले कर आया हूँ।

मैं एक गांव से हूं। लेकिन पिछले कई सालों से शहर में नौकरी कर रहा हूं। 

मैं गर्मी की चुट्टियो में गाँव जरूर जाता हूँ। मैं एक 5’6″ का नौजवान हूं, मेरे लंड का साइज 6.5 इंच है।

अब मैं आपको ज्यादा बोर न करते हुए अपनी हिंदी सेक्स कहानी पर आता हूं………

आप सभी लोग अपना लंड और चूत ले कर, चुदाई की कहानी (Chudai Ki Kahani) की इस कामुक दुनिया में सफर करने के लिए तैयार हो जाओ।

मेरी सारी फ़ैमिली दिल्ली में रहती है, पर मेरा एक घर गाँव में भी है। हमारे घर में कोई नहीं रहता है। 

मेरे गाँव के घर के बगल में मेरे छोटे चाचा जी का घर है। चाचा जी के घर में मेरे चाचा जी, मेरे चचेरे भाई और भाभी रहते हैं।

भईया पास के शहर में एक दुकान में काम करते हैं, तो उस हफ्ते में दो दिन ही घर में रहते हैं। 

बाकी के 5 दिन वो दुकान पर ही रहते हैं। मेरे चाचा जी भी सुबह खेतो में ही रहते हैं, खेतो को जानवरो से बचाने के लिए।

तो ये बात लॉकडाउन के बाद की है। 2021 की गर्मी में मैं अकेला ही गांव आया था। मेरे आने पर चाचा जी, भईया और भाभी बहुत खुश हैं। 

क्योकि मैं अपने गांव के घर में अकेला था, तो मेरा खाना रोज भाभी ही बनाती थी और चाचा जी के घर में ही मैं खाना खाता था।

अब मैं आपको मिलाता हूं, अपनी इस देसी सेक्स कहानी (Desi Sex Kahani) की हीरोइन से, जो मेरी भाभी है। भाभी का नाम उर्वसी है। 

तब उनकी उम्र 26 साल की होगी और तब उनकी शादी को 3 साल के लगभाग हो गए। उस वक्त उनको एक 8 महीने का बच्चा भी था।

भाभी दिखने में बहुत प्यारी और सेक्सी लगती है, उनकी हाइट 5’1″ होगी, उनका रंग थोड़ा सा सांवला है। उनका फिगर 34″28″34″ का होगा, भाभी का फिगर एक-दम जानलेवा कातिलाना है।

कुल मिला कर बोले, तो भाभी इतनी मस्त माल है, कि अच्छे-अच्छों का लंड उनकी सुंदरता और फिगर देख कर पानी छोड़ दे।

गांव में कुछ दिन हंसी खुशी में, सबसे बातें करने में और घूमने-फिरने में बीत गए। फिर एक दिन सुबह मुझे बाइक से भईया को दूसरे शहर में उनकी दुकान पर छोड़ना था।

फिर मैं भईया को छोड़ कर दोपहर 12 बजे बाइक लेकर वापस गांव में भाभी के घर आया। तब तक चाचा जी खेतो में जा चुके थे। मैंने भाभी को आवाज लगाई और बोला-

मैं: भाभी बहुत भूख लग रही है, खाना ले आओ।

फ़िर भाभी जब मुझे सब्जी देने के लिए नीचे झुकी, तो मेरी नज़र भाभी के ब्लाउज़ से झाँकते बूब्स पर पड़ी। 

उनकी क्लीवेज और थोड़ी सी चूची भी दिख रही थी। ये देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा, पर मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया।

उसके बाद हम दोनों ने मिल कर खाना ख़त्म किया। मैं बीच-बीच में मजाक भी करता था भाभी से। फ़िर भाभी बोली-

भाभी: हमने तो खाना खा लिया, अब बेबी को भी उसका खाना खिला देती हूं।

ये सुन कर मैं समझ गया, कि भाभी बेबी को दूध पिलाने जा रही थी। फिर भी उनके पीछे-पीछे उनके कमरे में चला गया। 

लेकिन भाभी ने साड़ी के पल्लू के अंदर ही बच्चे को दूध पिलाया। मैंने भाभी के बूब्स तो नहीं देखे, लेकिन ये सीन देख कर मुझे बहुत मजा आया था।

फिर मैं अपने घर में वापस आया और मैंने भाभी के बारे में सोच कर मुठ मारी। अब भाभी के प्रति मेरा नज़रिया बिल्कुल बदल गया था। 

अब मैं भाभी के नाज़ुक जिस्म का मजा लेना चाहता था और उनकी चूत की चुदाई करना चाहता था।

फ़िर मैं रोज़ चुप-चुप कर भाभी को बाथरूम में नहाते हुए देखने लगा, पर बाथरूम में लाइट ना लगी होने के कारण, मैं ज्यादा कुछ ठीक से नहीं देख पाता था। 

फ़िर भी मैं भाभी की चुचिया देख कर मुठ मारता था।

एक दिन भाभी ने देख लिया, कि मैं उनको नहाते हुए देख रहा था। मैं जल्दी से वहा से भाग कर भाभी के कमरे में चला गया। 

फिर जब भाभी नहा कर गीले बालों में, गीले ब्लाउज और पेटीकोट में कमरे में आई, तो वो बहुत गर्म लग रही थी। फिर मुझे देख कर भाभी बोली-

भाभी: आज कल बाथरूम के बहुत चक्कर लगा रहे हो, क्या बात है?

तब मैंने परेशान होकर कर भाभी को जवाब दिया-

मैं: बाथरूम में एक चीज़ है, जो इतनी सुंदर है, उसे देखने जाना पड़ता है।

ये सुन कर भाभी भी हंस पड़ी और बोली-

भाभी : हट पागल।

और ये बोल कर भाभी ने बात टाल दी। अब मुझे भी समझ आ गया था, कि मेरी लाइन क्लियर है और शायद भाभी मुझसे सेट हो जाये और मुझे भाभी की चुदाई का मौका मिल जाए। 

फिर उसी दिन जब मैं खाना खाने 1 बजे के आस-पास भाभी के घर गया, तो मैंने देखा, की घर में कोई नहीं था।

जब मैं भाभी के कमरे में पहुंचा, तो उनको देख कर मेरे होश ही उड़ गए। भाभी बिस्तर पर लेटी सो रही थी। 

भाभी का ब्लाउज उनके बूब्स के ऊपर था। उस वक्त उनके दोनों गोल-गोल कड़क बड़े बूब्स बिल्कुल नंगे बाहर थे।

भाभी के पास उनके बच्चे को देख कर मैं समझ गया था, कि भाभी बच्चे को दूध पिला कर वैसी ही सो गई थी। 

ये सीन देख कर मेरे लंड में तूफ़ान सा आ गया था और मेरा लंड बिल्कुल कड़क हो गया था।

फिर मैं भाभी के पास जा कर, पास से भाभी के चूचो को देखने लग गया। भाभी के निपल्स बिल्कुल काले जामुन जैसे थे। 

उनके बूब्स गोल-गोल और बिल्कुल टाइट थे। भाभी के बूब्सों में कई सारी नसें भी थीं, जिससे भाभी के चूचे और भी सेक्सी लग रहे थे।

फिर मैंने पहले भाभी की तरफ देख कर चेक किया, तो वो आराम से सो रही थी, फिर मैंने अपना हाथ उनकी प्यारी-प्यारी चूचियों पर आराम से रखा और उनके निपल्स को छूने लगा। 

फिर मैंने निपल्स पर किस भी किया और चूसा भी। मैंने उनके पूरे बूब्स पर किस किया।

फिर मैंने उनको हल्के से प्रेस किया। थोड़ी देर बूब्स प्रेस करने पर भाभी हिलने लगी, तो मैं थोड़ी साइड हट गया। 

फ़िर भाभी उठ गयी और उसने मुझे देखा। फिर उन्होंने अपने नंगे चूचे देखे और उन्हें तुरंट ब्लाउज के अंदर कर लिया।

मैं: क्या भाभी, कितना अच्छा नजारा था, क्यों छुपा लिया आपने अपने कबूतरों को?

भाभी बोली: शैतान, ये कबूतर पिंजरे में ही अच्छे लगते है।

और फिर भाभी ने मुझसे कहा-

भाभी: अच्छा आज तुमको अपने भईया को लेने जाना है, याद है ना?

फिर मैं खाना खा कर भईया को लेने शहर चला गया और फिर शाम को 7 बजे भईया को लेकर वापस गांव आ गया। 

फिर हमने थोड़ी बात की और 9 बजे खाना खा कर मैं अपना घर वापस आ गया।

लेकिन मुझे उस रात नींद नहीं आ रही थी और मुझे बार-बार भाभी के चूचे ही याद आ थे। फिर मैंने सोचा, कि क्यों ना जा कर देखु, कि भईया-भाभी क्या कर रहे थे। 

क्योंकि हमारे घर की छत आपस में जुड़ी हुई है, तो मैं छत से होते हुए, 11 बजे भाभी के कमरे के ऊपर पहुंच गया।

मैंने भाभी के कमरे की खिड़की से अंदर देखा, तो भईया नंगे थे और अपना लंड सहला रहे थे। भाभी अभी पेटीकोट में थी और बेबी को दूध पिला रही थी। फ़िर भईया बोले-

भईया: अरे जल्दी कर ना, बेबी की भूख तो मिटा दी, मेरी भी भूख मिटा दे आके। कितने दिन हो गए हैं, तेरा मीठा दूध पिये हुए।

भाभी: अरे थोड़ा सा सब्र करो, आपके लाडले का पेट भर जाने दीजिए, फिर आपकी भी भूख मिटा दूंगी।

फ़िर भाभी बेबी को सुला कर भईया के पास वैसे ही अपने खुले दूधो के साथ चली गई। भईया ने तुरंत खींच कर भाभी को अपने नंगे जिस्म से चिपका लिया और भाभी को किस करने लगे।

भईया दोनो हाथो से भाभी के चूचे दबाने लगे, जिससे भाभी के बूब्स से दूध निकलने लगा। ये देख कर फिर भईया ने भाभी को बिठा लिया ।

उनको गोद बैठा लिया। फिर भईया बच्चों की तरह भाभी का दूध पीने लगे।

ये सब देख कर, मैं बहुत गरम हो गया और वही अपनी पैंट नीचे करके लंड हिलाने लगा और भईया-भाभी की काम लीला देखने लग गया। भाभी भी भईया का लंड हिला रही थी, फ़िर भाभी बोली-

भाभी: बस दूध ही पियोगे, या चूत का भी इलाज करोगे? कब से रो रही है ये।

भईया: देखु तो, कितना रो रही है तेरी चूत।

फिर भईया ने भाभी को लेटा दिया और भाभी की चूत में उंगली डाल कर अंदर-बाहर करने लगे। अब भाभी भी सिसकियाँ लेने लगी थी।

भाभी : आआअहह.. उम्म्म.. आआहह..

फिर भईया ने अपना लंड पे कंडोम चढ़ा कर लंड चुत में सेट किया और 1-2 धक्के में लंड चुत में डाल दिया।

भाभी: आआअहह.. आराम से रहो, मैं कहां भागी जा रही हूं।

भईया ने भाभी की बात नहीं सुनी और उनको ज़ोर-ज़ोर से भाभी की चूत की चुदाई (Bhabhi Ki Chut Ki Chudai) लगे। भाभी भी नीचे से मिशनरी पोजीशन में हिल-हिल कर मजे लेने लगी।

भाभी : आआअहह.. मेरे राजा, चोद दो आज मुझे, उम्म्म्म बहुत तड़प रही थी ये चूत पिछले कई दिनों से। आआअहह.. निकाल दो आज इसकी सारी गर्मी, आआह्ह्ह्ह चोद दो मुझे आआह्ह्ह…..

फिर कुछ ही मिनट की भईया भाभी की चुदाई (Bhaiya Bhabhi Ki Chudai) के बाद.. भईया का पानी निकल गया और वो थोड़ी देर भाभी के ऊपर वैसे ही लेटे रहे। फिर वो उठ कर अपने कंडोम को निकाल दिया और साइड में फेंक दिया।

फिर भईया भाभी को किस करने लगे और सो गये। भाभी भी अपनी चूत में उंगली डाल कर उसे चुसने लगी और लाइट बंद करके सो गई। 

भाभी भईया के साथ नंगी ही सो गई थी। फिर मैं भी मुठ मार के अपने घर आ कर सो गया।

दोस्तों आज की भाभी की चुदाई की कहानी (Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani) में सिर्फ इतना ही। आगे की कहानी मैं आपको इस रियल सेक्स स्टोरी (Real Sex Story) के अगले भाग में बचाचांगा। तब तक हिंदी सेक्स कहानिया (Hindi Sex Stories) पढ़ते रहिये और लंड को हिलाते रहिये। धन्यवाद।

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