May 21, 2024
Tour Par Chudi

हेलो दोस्तों, मैं हूँ ज्योति। मेरी उम्र 35 साल है। ये हिंदी सेक्स कहानी मेरी है, ये कहानी एक माहीन पहले का है जब मैं कन्याकुमारी के Tour Par Chudi थी, ये टूर प्रोग्राम 5 दिन का था।

मेरा नाम मेरे रूप के बिल्कुल अनु-रूप है, या यू कहिए, कि ज्योति की बूंदो सी कोमल काया है मेरी।

मेरे बड़े-बड़े रस से भरे हुए स्तन और मेरी मोती और कोमल गांड मुझे बेहद सेक्सी बनाती है।

तभी मेरे भरे हुए जिस्म और गदराई जवानी को देख कर, लड़के हाय-हाय करते हैं और बूढ़े मेरे जिस्म को एक बार छूने के बहाने ढूंढते रहते हैं।

मैं अपने रूप का बखान करते हुए आपका ज्यादा समय नहीं लूंगी, तो मैं सीधी अपनी कहानी पर आती हूं।

एक बात है आप सबको बता दूं, सेक्सी फिगर होने के साथ-साथ मैं एक बहुत बड़ी चुड़क्कड़ भी हूं।

मई 18 से 20 साल के नौजवान लड़के को देख कर, अपनी चुदाई करवाने के लिए मचल उठती हूं।

मैं वाहा एक होटल में रुकी हुई थी। काम के सिलसिले में, तो सारे दिन का पता भी नहीं चलता था,

सारा दिन कब निकल जाता था।

लेकिन रात में मेरी चूत की आग और उसको चुदवाने की चाहत, मुझे चेन से नहीं रहने देती थी।

वासना की आग में मैं जल रही थी। क्या करू, क्या ना करू, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

मैंने अपने बदन पर नाइट गाउन पहनना हुआ था और उस गाउन में मैं और भी आकर्षण और सेक्सी लग रही थी।

मैं अपने कमरे से बाहर लॉन में आ गई और ऐसे ही घूमने-फिरने लग गई।

तभी अचानक मुझे लॉन में एक 20-21 साल का लड़का दिखाया गया।

वो लड़का काफी तगड़ा, जवान और खूबसूरत था। उसको देखते ही मेरे अंदर की वासना बेकाबू हो गई।

( कन्याकुमारी के टूर पर चुदी – Tour Par Chudi )

जिस तरह के युवक की मैं कल्पना कर रही थी, मानो वैसा ही जवान युवक मेरे सामने आके खड़ा हो गया था।

मैं तो यूएस लड़के से अपनी चुदाई करवा के लिए मचल उठी। मैंने उसको आँखों के इशारे से अपने पास बुला लिया।

Tour Par Chudi

फिर मैंने उसको उसका नाम पूछा। उसने छोटा सा, लेकिन बेहद प्यारा सा जवाब दिया-

लड़का: जी मेरा नाम रवि है.

मैने ही रवि कहते हुए, हाथ मिलाने के लिए अपनी नाज़ुक कलायी उसके सामने कर दी।

उसने मेरे कोमल हाथ को अपने हाथ में ले लिया।

उसके मजबूत और मर्दाना हाथ के स्पर्श से ही मेरे पूरे बदन में झन-झनहत सी होने लग गई।

मेरे नाज़ुक हाथ के स्पर्श से, शायद उसका भी यहीं हाल हुआ था।

उसने बताया, कि वो होटल में रूम सर्विस डिपार्टमेंट में नौकरी करता है।

मैं उसको अपने कमरे में ले आई और एक 500 का नोट देते हुए, बीयर की बोतल लाने को बोल दिया।

रवि वाहा से चला गया और मैं रवि से मधुर-मिलन की कल्पना में खो गई।

( कन्याकुमारी के टूर पर चुदी – Tour Par Chudi )

मेरे हाथ खुद-ब-खुद मेरी चूत के इर्द-गिर्द मंडराने लग गए। मैं अब किसी भी तरह से, रवि से अपनी चुदाई करवाना चाहती थी।

मेरा ख्याल रवि की आवाज से टूटा और वो सारा सामान ले आया था। मैं रवि को मुझे कंपनी देने की रिक्वेस्ट करने लग गई।

पहले तो वो नहीं माना, लेकिन फिर वो मान गया।

उसने मुझे कहा, कि वो थोड़े समय के बाद मुझे ज्वाइन करेगा, जब उसकी ड्यूटी का समय खत्म हो जाएगा, तब।

मैं तो बस उसकी कल्पना में ही थी और उसकी प्रतीक्षा का समय मैंने उसके बारे में सोच कर ही निकाल दिया।

कुछ देर बाद रवि आ गया और उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख कर, मैं अपने आप को रोक नहीं पाई।

मैंने अपनी बाहों का हार रवि के गले में डाल दिया और उससे बिल्कुल चिपक गई।

मेरे मुलायम और कोमल चूचो के स्पर्श से रवि का बदन झंझना उठा।

उसने मेरे होठों से अपने होठों को चिपका दिया और मेरे गुलाबी होठों का रस चूसने लगा।

जैसे-जैसे रवि मेरे होठों का रस चूसता है, मैं मदिरा के नशे में डूबती चली गई।

रवि मेरे होठों का रस चूसता हुआ मेरे स्तन पर आ गया था।

चुड़क्कड़ लड़किया कभी भी बुलाये और कही भी। 

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मेरे मुलायम और कोमल रस भरे चूचो को वो सहलाया और मसल रहा था।

मुझे पता ही नहीं चला, कि कब मेरा हाथ रवि के लंड पर चला गया और कब मैं उसकी फौलादी और मोटे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाने लग गई।

मेरे मुलायम हाथों में रवि का लंड फुकारे मार रहा था और काबू में नहीं आ रहा था।

मैं उसका इतना विशाल, मोटा और लम्बा लंड देख कर फूले नहीं समा रही थी।

( कन्याकुमारी के टूर पर चुदी – Tour Par Chudi )

फ़िर रवि नीचे उतरता हुआ मेरी हल्दी घाटी के मैदान पर उतरने लगा।

क्या मैदान पर चूत और लंड की जंग होने वाली थी।

रवि के हाथ मेरी चूत पर क्या पड़े, मेरी चूत की दोनो फाँके आपस में रगड़ खाने लग गई।

Tour Par Chudi

ऐसा लग रहा था, कि चूत अपनी धार को लंड लेने के लिए तैयार कर रही थी।

रवि अपने हाथ से मेरी चूत को सहला रहा था और पुचकार रहा था।

दूसरा और वो मेरे स्तनों को अपने होठों से चूस-चूस कर निचोड़ रहा था।

ऐसा लग रहा था, मानो वो मेरे स्तन का सारा दूध पी जाना चाहता हो।

लेकिन मैंने सोचा, कि मेरे स्तन तो बिना दूध के।

पर मैंने उसको निचोड़ने दिया, क्योंकि उसके बाद, मैं उसके लंड को निचोड़ने वाली थी।

मैं उसके लंड के पानी की एक-एक बूंद निचोड़ लेने वाली थी।

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रवि के मन में कुछ और ही चल रहा था। फिर उसने मुझे अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया।

उसने मुझे सीधा किया और मेरी टांगो को खोल दिया।

फिर वो मेरी जांघो के बीच आया और मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया उसने।

रवि चूत चाटने में काफ़ी परिपक्व लग रहा था। मुझे एहसास हुआ, कि वो तो चुदाई में मास्टर लग रहा था।

फिर मैंने ऐसे ही उसको पूछा-

मैं: रवि, अब तक कितनी चूत चोद चुके हो?

लेकिन रवि की बात सुन कर मैं हेयरां हो गई और ज्यादा रोमांस भी हो गई।

रवि अभी तक वर्जिन था और उसको इतना अनुभव ब्लू फिल्में देख कर हुआ था।

मेरी चूत की आग मुझे जला रही थी और मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ लिया और बोली-

मैं: अब और नहीं बर्दाश्त होता मेरे राजा. अब डाल दो अपने मसल्स को मेरी उखल में और कूट-कूट कर रस की एक-एक बूंद को बाहर निकाल दो।

इस चुत की आग की जलन मैं और नहीं सह पाऊंगी।

रवि ने मेरी चूत की ज्वाला की तपिश को महसूस किया।

उसने मेरी टांगो को फेलाया और अपने लंड को टांगो के बीच चूत पर रख दिया।

फिर उसने एक ज़ोरदार झटका लगाया और उसका 9 इंच का विशाल लंड मेरी चूत को चीरते हुए, सांसे कर अंदर घुस गया।

हजारो बार चुदी मेरी चूत इतने बड़े और मोटे लंड के धक्के को बर्दाश्त नहीं कर पाई और मेरे मुँह से आह.. निकल गई।

इसके साथ ही मुझे इतना मजा मिला कि मेरी गांड भी अपने आप ही उछल पड़ी।

मेरा रिस्पॉन्स पा कर, रवि मुझे दे दना दन चोदने लग गया।

रवि के हर धक्के का जवाब, मैं गांड उछाल-उछाल कर दे रही थी।

चूत और लंड की घमासान लड़ी पूरे 45 मिनट तक चली।

चूत और लंड दोनों पसीन-पसीने हो चुके थे।

पसीने की बूंदों में मिक्स हुई लंड की मार खा-खा कर, मेरी चूत से फच-फच की आवाज आने लग गई थी।

मैं भी आह्ह.. आह्ह.. की आवाज कर रही थी और अब मेरी चूत हिम्मत खो चुकी थी।

चूत से पानी की धार फूट चुकी थी और मैं निढाल हो गई थी।

इसके बीच में लंड महाराज को भी उबकायी आयी और उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया।

गरम रस के एहसास से मुझे जो स्वर्गिक आनंद मिला, उसको मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती।

बस इतना कहूंगी, आप भी चुदवा कर देख ले, आपको पता चलेगा कि कितना मजा आता है।

अब चुदाई का एक अध्याय पूरा हो चुका था और दूसरे की तैयारी में हम दोनों लगे हुए थे।

पूरी रात मैं चुदती रही और रवि मुझे बिना थके चोदता रहा।

कहानी को यहीं विराम देती हूं और आप सभी लोगों की प्रतिक्रिया का मुझे इंतजार रहेगा।

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